संस्थान के अध्येता

संस्थान में अध्ययन हेतु आए विद्वान संस्थान की रीढ़ की हड्डी होते हैं। संस्थान में रह रहे सभी विद्वान जो अपनी शोध परियोजनाओं पर काम कर रहे हैं, संस्थान के अध्येता के रूप में सूचीबद्ध हैं।

अध्येताओं का चयन

संस्थान की अध्येतावृति के लिए देश भर में विज्ञापित किया जाता है। यह अध्येतावृति शासी निकाय द्वारा अध्येतावृति निर्णय समिति की सिफारिशों पर प्रदान की जाती है जो निदेशक को विद्वानों की योग्यता सूची व परियोजनाओं को निर्धारित करने में सहायता प्रदान करती है। इस समिति में विभिन्न विषयों से संबद्ध विशेषज्ञ शामिल होते हैं। यह एक विविध स्तरीय चयन प्रक्रिया है। आवश्यक नहीं कि यह प्रक्रिया विज्ञापनों के प्रत्युत्तर तक ही सीमित रहे। संस्थान निदेशक, शासी निकाय, तथा सोसायटी के सदस्यों द्वारा सुझाए गए विख्यात विद्वानों के नामों पर विचार करने के लिए भी स्वतंत्र है। क्षेत्रीय तथा उप-क्षेत्रीय प्रयासों के आधार पर भी प्रतिभा की पहचान की जा सकती है। यह अध्येतावृति अंततः शासी निकाय द्वारा अध्येतावृति निर्णय समिति की सिफारिशों पर प्रदान की जाती है। इस समिति में विभिन्न विषयों से संबद्ध विशेषज्ञ शामिल होते हैं। शासी निकाय किसी भी सुविख्यात विद्वान को अध्येता के रूप में आमंत्रित कर सकती है।

अध्येतावृति की अवधि

अध्येतावृति की न्यूनतम अवधि तीन महीने तथा अधिकतम दो वर्ष रहती है। प्रारम्भ में यह अध्येतावृति एक वर्ष के लिए प्रदान की जाती है तथा शासी निकाय अधिकतम दो वर्षों तक बढ़ा सकती है।

सुविधाएं

 अध्येताओं को संपदा में स्थित काटेजिस में यथायोग्य सुसज्जित निःशुल्क आवास सुविधा प्रदान की जाती है। जहां तक संभव है संस्थान की ईपीएबीएक्स के माध्यम से दूरभाष सुविधा प्रदान की गई है।

सभी अध्येताओं को प्रदान की गई सुविधाएं इस प्रकार हैः

  1. एक अध्ययन कक्ष जिसे उन्हें अन्य किसी एक अथवा दो अध्येताओं के साथ सांझा करना पड़ सकता है।
  2. कम्यूटर तथा ई-मेल सुविधा तथा
  3. (3) आवश्यक स्टेशनरी सामग्री।

अध्येतावृति अनुदान

संस्थान विद्वानों को अध्येतावृति के दौरान उन्हें सेवाकालीन प्राप्त वेतन को संरक्षित करता है।