प्रोफेसर मकरंद आर. परांजपे

भारतीय उच्च अध्ययन संस्थान, शिमला में निदेशक का पदभार संभालने से पूर्व मकरंद आर. परांजपे जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय, नई दिल्ली में पढ़ाते थे जहां वे वर्ष 1999 से प्राध्यापक रहे हैं। उससे पूर्व वे भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, दिल्ली में मानविकी एवं समाजिक विज्ञानों के विभाग में सहायक प्राध्यापक (1994-1999) तथा हैदराबाद विश्वविद्यालय में अध्येता, व्याख्याता तथा रीडर (1986-1994) रह चुके हैं।
प्रोफेसर परांजपे ने सेंट स्टीफन कालेज, दिल्ली विश्वविद्यालय से अंग्रेजीऑनर में स्नातक करने के उपरांत अर्बाना-शैम्पेन (अमेरिका) में स्थित यूनिवर्सिटी ऑफ़ इल्लिनाइस से स्नातकोर तथा डाक्टरेट की उपाधि प्राप्त की। उन्होंने प्रारंभिक शिक्षा विशप काटन ब्याज स्कूल, बेंगलुरू तथा प्री-यूनिवर्सिटी मद्रास क्रिश्चियन कालेज, चेन्नई से प्राप्त की। प्रोफेसर परांजपे साहित्यिक आलोचना, कविता, उपन्यास तथा साहित्यिक कथेतर साहित्य से संबंधित लगभग बीस पुस्तकों की रचना कर चुके हैं। इसके अतिरिक्त विविध विषयों पर लगभग दो दर्जन पुस्तकों का संपादन भी कर चुके हैं। उन्होंने हैनरी डैरोजिओ, रवीन्द्रनाथ टैगोर, स्वामी विवेकानंद, श्री अरविंदो, महात्मा गाँधी, सरोजिनी नायडू तथा राजा राव सहित अनेक आधुनिक भारतीय साहित्य व संस्कृति निर्माताओं के बारे में मौलिक व सटीक कार्य किया है। व्यापक सामाजिक, दार्शनिक तथा सांस्कृतिक विषयों में भी उनकी गहन रूचि है जिनके विज्ञान तथा धर्म, जैव चिकित्सा तथा वैकल्पिक उपचार पद्धतियां, पूर्व औपनिवेशिक राष्ट्रीय संस्कृति, धर्म तथा विकास, साहित्य तथा प्रवासी भारतीय संस्कृति तथा भारतीय संस्कृति का वैश्वीकरण आदि विषयों पर संपादित अंक उपलब्ध हैं।
देश-विदेश के अग्रणी विशेषज्ञ समीक्षित पत्रिकाओं तथा पुस्तकों में उनके लगभग 175 अकादमिक शोधपत्र प्रकाशित हो चुके हैं।
टाइम्स ऑफ़ इण्डिया, इक्नॉमिक टाइम्स, हिन्दुस्तान टाइम्स, हिन्दू, डीएनए, बिजनेस सटैण्डरड, संडे ऑब्ज़रवर, स्टेट्स्मैन, टेलीग्राफ, डेक्कन हेराल्ड, डेक्कन क्रानिकल तथा पाइअनीर तथा इण्डिया टूडे, आउटलुक, संडे, वीक, फेमिना तथा स्वराज्य जैसे प्रमुख पत्र-पत्रिकाओं में उनके 1000 के लगभग आलेख, निबंध, पुस्तक-समीक्षाएं, अभिमत तथा ‘‘मिडल’’ प्रकाशित हो चुके हैं।
उनकी हाल ही में डिबेटिंग दी ‘पोस्ट’ कंडीशन इन इण्डियाः क्रिटिकल वर्नाकूलरस, अनआथराइज्ड माडरनिटीस पॉलिटिक्स, पोस्ट-कलोनिअल कंटेन्शनस (न्यू दिल्ली एण्ड एबिंगडन, 2018), कल्चरल पॉलिटिक्सस इन माडरन इण्डिया: पोस्ट कलोनिअल ऐस्पैक्ट्स प्रोस्पैक्टस, कलरफुल कोस्मापोलिटनिज्म, ग्लोबल प्रोक्सिमिटीस (रूटलेज, 2016), दी डेथ एण्ड आफ्टर लाइफ आफ महात्मा गाँधी (पैन्गुइन रैण्डम हाउस, 2015), तथा मेकिंग इण्डिया: कलोनिअलिज्म, नेशनल कल्चर एण्ड दी आफ्टर लाइफ आफ इण्डियन इंग्लिश ऑथोरिटी (स्प्रिंगर, 2013) नामक पुस्तकें प्रकाशित हुई हैं।
समीक्षात्मक पुस्तकों के अलावा प्रोफेसर मंकरद के छः काव्य-संग्रह तथा कथा-संग्रह (दो उपन्यास तथा लघु कहानी-संग्रह) प्रकाशित हैं। उनके हाल ही में प्रकाशित सृजनात्मक आलेख ट्रांजिट पैसेंजर/पैसेजेइरियो एम ट्रांजिटो (ह्यूमैनिटस, 2016) बाडी आफरिंग उपन्यास (न्यू दिल्ली: रूपा, 2013) हैं। उनके द्वारा संपादित पुस्तकों में स्वामी विवेकानंद: ए कंटेम्परेरी रीडर (रूटलेज, 2015) तथा हीलिंग एक्रास बाउंडरीज: बायोमेडिसन एण्ड अल्टरनेटिव थेरापेयूटिक्स (रूटलेज, 2016) सम्मिलित हैं।
इस दशक में प्रोफेसर परांजपे यूनिवर्सिटी ऑफ टैक्सास, ऑस्टिन में एन्ड्रयू मेलान फैलो (जून-जुलाई 2018), डीएएडी ग्लोबल दक्षिण अफ्रीका में विजिटिंग फैलो (मई-जून 2015) रहे चुके हैं। इसके अतिरिक्त वे यूनिवर्सिटी ऑफ ट्यूबिंगेन, वर्ल्ड लिटरेचर में ऐरिक एयूरबैक विजिटिंग प्रोफेसर (जुलाई-दिसंबर 2014), यूनिवर्सिटी ऑफ बर्न, स्विटजरलैण्ड में विजिटिंग प्रोफेसर, एशिया रिसर्च इन्स्टिटूट, नेशनल यूनिवर्सिटी ऑफ सिंगापुर में विजिटिंग सीनियर फैलो (जनवरी-अप्रैल 2015), दक्षिण एशियाई अध्ययन कार्यक्रम, नेशनल यूनिवर्सिटी ऑफ सिंगापुर में भारतीय अध्ययन के प्रारंभिक अध्यक्ष (2010-2011), यूनिवर्सिटी ऑफ साओ पालो, ब्राजील में कैपस विजिटिंग प्रोफेसर (अगस्त-दिसंबर 2011) तथा ऑक्सफोर्ड सेंटर फार हिन्दू स्टडीज, ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी में शिवदासनी विजिटिंग फैलो (अक्तूबर-दिसंबर 2009) रहे हैं।
प्रोफेसर परांजपे भारत के अधिकतर राज्यों तथा विश्व के लगभग 50 देशों में लगभग 500 संगोष्ठियों में अपने व्याख्यान एवं वार्ताएं प्रस्तुत कर चुके हैं।
वे जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय तथा देश में राष्ट्रीय महत्व के अनेक संस्थानों की महत्त्वपूर्ण समितियों में कार्य कर चुके हैं। वे भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, इंदौर की प्रबंधकीय सभा के सदस्य; भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद की आम सभा के सदस्य; नेहरू स्मृति संग्रहालय तथा पुस्तकालय की सोसायटी के सदस्य; भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, मद्रास के अध्यक्षीय नामजद सदस्य तथा केन्द्रीय विश्वविद्यालयों तथा भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थानों समेत देश के प्रमुख उच्चत्तर शिक्षण संस्थानों में चयन समितियों के सदस्य हैं। वे मारीशस तथा माल्या विश्वविद्यालयों में बाह्य परीक्षक भी रह चुके हैं।
प्रोफेसर परांजपे राष्ट्रीय तथा अंतर्राष्ट्रीय दोनों वित्त प्रबंधित अनेक परियोजनाओं के प्रधान अन्वेषक रहे हैं। वे जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय के अंग्रेजी अध्ययन केन्द्र को प्रदान किए गए विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के विशेष सहायता कार्यक्रम के उद्घाटन समन्वयक थे और साथ ही उन्हें उनकी ‘‘साइंस एण्ड स्पिरिचुअलिटी इन माडरन इण्डिया’’ नामक परियोजना के लिए मुख्य कार्यक्रम अनुदान से सम्मानित किया जा चुका है। प्रोफेसर परांजपे भारतीय संस्कृति तथा विचार, विशेषकर पार-सांस्कृतिक, अंतर्राष्ट्रीय संदर्भ को बढ़ावा देने को समर्पित एक गैर-लाभकारी न्यास ‘संवाद इण्डिया फाउंडेशन’ के संस्थापक ट्रस्टी हैं। वे चार्ल्स लियोपोल्ड मेयर फाउंडेशन, फ्रांस द्वारा प्रायोजित चीन-भारत अंतर-सांस्कृतिक संवाद के संयुक्त-समन्वयक तथा चार्टर ऑफ यूनिवर्सल रिस्पांसिबिलिटी की आलेखन एवं प्रसार समिति के सदस्य भी रहे हैं।
प्रोफेसर परांजपे को डायलाग ऑफ सिवलिजेशन (तेहरान), वर्साय फ्रांस में आयोजित यूनेस्को विश्व सांस्कृतिक शिखर सम्मेलन, अफ्रीका एशिया-अफ्रीका लिटरेरी फैस्टिवल, जेजु, दक्षिण कोरिया, साल्ट लेक सिटी, उटाह में धर्म संसद सहित अनेक अंतर्राष्ट्रीय कार्यक्रमों तथा सम्मेलनों में प्रतिभागी के रूप में आमंत्रित किया जा चुका है। वे ‘‘भारत शक्तिः पुदुच्चेरी लिटरेचर फैस्टिवल’’ संस्थापक और सह-क्यूरेटर थे।

 वर्तमान में प्रोफेसर परांजपे भारतीय उच्च अध्ययन संस्थान, शिमला की परिसर में अपनी धर्मपत्नी गायत्री अय्यर के साथ रहते हैं जो एक कलाकार, लेखिका तथा योग शिक्षिका हैं।

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