Dr. Harsha Trivedi
Designation-Fellow
Email- harsha.trivedi@vips.edu
EPBAX-
Duration of Fellowship  June 2025 to  June 2026
Research Project “भारतीय ज्ञान परंपरा में पंडित श्रीराम शर्मा आचार्य के दर्शन की उपादेयता”
About 

डॉ. हर्षा त्रिवेदी हिंदी भाषा एवं साहित्य की एक प्रतिष्ठित लेखिका, शिक्षाविद और समाजसेविका हैं। राजस्थान के डूंगरपुर में जन्मी और उदयपुर में निवासरत डॉ. त्रिवेदी वर्तमान में विवेकानंद इंस्टिट्यूट ऑफ प्रोफेशनल स्टडीज-टीसी, दिल्ली (गुरु गोविंद सिंह इंद्रप्रस्थ विश्वविद्यालय से संबद्ध) में सहायक प्राध्यापक के रूप में कार्यरत हैं। वर्तमान में आप शिमला स्थित भारतीय उच्च अध्ययन संस्थान, राष्ट्रपति निवास की फेलो हैं। फेलोशिप का आपका विषय है- ‘भारतीय ज्ञान परंपरा में पंडित श्रीराम शर्मा आचार्य के दर्शन की उपादेयता’
आपने मोहनलाल सुखाड़िया विश्वविद्यालय, उदयपुर से कला स्नातक, बी.एड, एम.ए. (हिंदी) तथा हिंदी साहित्य में पीएच.डी की उपाधि प्राप्त की है। आपका शोध विषय था: “पद्मश्री दयाप्रकाश सिन्हा के नाटकों का अनुशीलन” । आपने 2012 में हिंदी साहित्य में RPSC -SET तथा UGC-NET परीक्षा उत्तीर्ण की हैं। इसके अतिरिक्त आपने जनार्दन राय नागर राजस्थान विद्यापीठ, उदयपुर से मानव संसाधन प्रबंधन में एम.बी.ए तथा शिक्षा विषय में भी एम.ए किया है।
हिंदी साहित्य, विशेष रूप से नाटक और कविता में डॉ. त्रिवेदी की गहन विशेषज्ञता है। आप विगत 12 वर्षों से शिक्षण कार्य में संलग्न हैं ; साथ ही साहित्य, समाज सेवा, सनातन संस्कृति तथा अध्यात्म के क्षेत्र में सक्रिय भूमिका निभा रही हैं। आप 8 पुस्तकों की लेखिका हैं, जिनमें ‘सहारों का बंधन’( हिंदी नाटक) ‘ नाटककार दयाप्रकाश सिन्हा’, ‘कहीं तो हो तुम'( कविता संग्रह) 'लौट के आना' ( कविता संग्रह) ‘स्वामी विवेकानंद: समग्र वैचारिक क्रांति’, ‘भगवान परशुराम: आदर्श, प्रादर्श और प्रतिदर्श’ तथा ‘राजस्थानी सिनेमा का इतिहास’ प्रमुख हैं।
डॉ. त्रिवेदी द्वारा दिव्यांगजन पर लिखित नाटक ‘सहारों का बंधन’ पुस्तक का विमोचन लंदन की ऊर्जा मंत्री मैडम बैरोनेस संदीप वर्मा द्वारा किया गया तथा ‘नाटककार दयाप्रकाश सिन्हा’ पुस्तक का लोकार्पण गुजरात के राज्यपाल माननीय आचार्य देवव्रत द्वारा संपन्न हुआ।
30 राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठियों में आपने पत्र-वाचन किया है तथा अब तक 35 शोध-आलेख राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हो चुके हैं। आपने वर्ष 2019 में संयुक्त राष्ट्र संघ (जिनेवा, स्विट्ज़रलैंड) में भारत का प्रतिनिधित्व करते हुए "Existential and Functional Harmony Between Man and Nature: A Rigvedik Phenomenon" विषय पर शोधपत्र प्रस्तुत किया। वर्ष 2023 में स्वामी विवेकानंद सांस्कृतिक केंद्र, भारतीय दूतावास, म्यांमार एवं 2024 में लाल बहादुर शास्त्री सांस्कृतिक केंद्र, भारतीय दूतावास, ताशकंद, उज़बेकिस्तान में हिंदी और सनातन संस्कृति विषय पर आपके व्याख्यान हो चुके है ; साथ ही उज़बेकिस्तान के राष्ट्रीय चैनल FLTV पर आपका 22 मिनट का विशेष साक्षात्कार भी प्रसारित हुआ।
आपको भूतपूर्व केंद्रीय मंत्री स्वर्गीय गिरिजा व्यास द्वारा समाज सेवा में विशिष्ट योगदान हेतु नारी शक्ति सम्मान’, महाराज कुँवर लक्ष्यराज सिंह मेवाड़ द्वारा ‘नारी प्रतिभा सम्मान’ एवं दिल्ली में नोएडा फ़िल्म सिटी के प्रमुख श्री संदीप मारवाह द्वारा ‘डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन अवार्ड - 2023’ सहित कई राष्ट्रीय सम्मान से नवाजा गया हैं। राजस्थान इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल में भारत सरकार के स्वच्छता अभियान पर आधारित शॉर्ट फिल्म ‘द लिटिल चाइल्ड' के लेखन हेतु आपको बेस्ट फिल्म अवॉर्ड मिला तथा केंद्रीय शिक्षा मंत्री स्वर्गीय किरण माहेश्वरी जी के जीवन पर आधारित डॉक्यूमेंट्री ‘राजसमंद विकास किरण’ की पटकथा भी आपके द्वारा लिखी गई है।
वर्ष 2020 में आपकी कविता ‘जीवन राग’ को आचार्य महाप्रज्ञ जन्म शताब्दी वर्ष में प्रकाशित विशेष संकलन में सम्मिलित कर वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज किया गया। अल्पकालिक रुचि के रूप में आकाशवाणी और रेडियो कार्यक्रमों में भी आप सहभागिता करती रही है ।
वर्तमान में आप विप्र फाउंडेशन के आनुषंगिक संगठन 'इंटरनेशनल सोसाइटी फॉर परशुराम कॉन्शसनेस' (इस्पेक-ISPAC ) की चेयरपर्सन के रूप में भारत, नेपाल, जर्मनी, जापान, ऑस्ट्रेलिया आदि देशों में सनातन धर्म एवं भगवान परशुराम के विचारों के प्रचार-प्रसार में पूर्ण समर्पित है। संस्था के मुख्य संरक्षक अरुणाचल प्रदेश के माननीय उप-मुख्यमंत्री चाउना मीन के नेतृत्व में अरुणाचल प्रदेश मे भगवान परशुराम की विश्व की सबसे विशाल प्रतिमा की स्थापना (भारत सरकार तथा विप्र फाउंडेशन के संयुक्त प्रोजेक्ट) में भी आप अपना महत्वपूर्ण योगदान दे रही है।
डॉ. त्रिवेदी साहित्यिक, शैक्षणिक, सामाजिक और आध्यात्मिक क्षेत्र की एक बहुआयामी प्रतिभा हैं, जिनकी लेखनी और विचारधारा समाज के उत्थान और सनातन संस्कृति की पुनर्स्थापना में महत्वपूर्ण भूमिका अदा कर रही है ।

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